असफल भविष्यवाणी की एक घटना

मेरे एक मित्र हैं, छात्रजीवन के सहपाठी । वैज्ञानिक विषयों में उनकी रूचि बचपन से ही रही है । ज्योतिष में उनका तनिक भी विश्वास नहीं है, यद्यपि उनके पुरखे कभी पौरोहित्य कर्म के साथ ज्योतिष का कार्य भी करते थे । लेकिन अब शायद ही कोई बचा होगा जो इस खानदानी व्यवसाय में रह गया हो । मेरे मित्र ने एक बार मुझसे ज्योतिषिक भविष्यवाणी से संबंधित एक घटना का जिक्र किया था, जो उनके कुटुम्ब में कभी घटी थी और जिसके बारे में उन्होंने अपने पिताश्री के मुख से काफी कुछ सुन रखा था । घटना कोई सौ-सवासौ वर्ष पहले की है, अर्थात् उन्नीसवीं सदी के अंत की । मित्र के पिताजी ने बताया था कि उनके दादाजी (मित्र के परदादा) ने ज्योतिषिक गणना से प्रेरित होकर ही पहले से ही विवाहित पुरुष से अपनी बेटी का विवाह सोच-समझ कर संपन्न किया था । लेकिन वही ज्योतिष उन्हें यह संकेत नहीं दे सका था कि उनकी बेटी जल्दी ही विधवा भी हो जायेगी । मित्र के द्वारा बयान किया गया किस्सा मुझे काफी रोचक लगा । हुआ क्या इसे सुनाता हूं ।

मित्र के कथनानुसार उनके परदादा एक बार अपने एक रिश्तेदार के यहां कन्यापक्ष के निमंत्रण पर वैवाहिक समारोह में सम्मिलित होने गये थे । रिश्तेदार के यहां पहुंची हुई बारात में उनके होने वाले दामाद भी बतौर बाराती पहुंचे थे । बारातियों और घरातियों के बीच भेंट-मुलाकातों और परस्पर परिचय की औपचारिकताओं के दौरान परदाद का अपने भावी दामाद से साक्षात्कार हो गया । भावी दामाद भी स्वयं ज्योतिष में रुचि रखते थे, अतः दोनों को बातचीत के लिए अच्छा विषय मिल गया । वार्तालाप के दौरान भावी दामाद ने अपने होने वाले श्वसुर के सामने अपनी जन्मकुंडली में ग्रहों की क्या स्थिति है इसका पूरा ब्यौरा प्रस्तुत कर दिया । मित्र के परदादा ने कुछएक क्षण की मौखिक ज्योतिषिक गणना और विचार-मंथन के पश्चात् उनको इस अहम ‘तथ्य’ से अवगत कराया कि उनके भाग्य में द्वि-विवाह का योग है । उन्होंने यह भी भविष्यवाणी कर दी कि उनकी पहली पत्नी अपनी एकमात्र संतान के साथ कालांतर में परलोकवासी हो जायेंगी ।

परदादा के भावी दामाद के लिए यह सब सुनना चिंताजनक था । ज्योतिष में गहरी आस्था के कारण वे कही गयी बातों को हंसते हुए नहीं नकार सकते थे । कदाचित् उनके अपने ज्योतिष-ज्ञान क अनुसार कथित बातों में शंका की गुंजाइश नहीं थी । मुद्दा सचमुच में गंभीर लगने लगा । दोनों ने मिलकर यह निष्कर्ष निकाल लिया कि जब प्रथम पत्नी का मृत्युयोग है ही तो दूसरा विवाह कर लेना ही उचित है । और जब दूसरा विवाह करना ही है तो उसे समय पर कर लेना ही बुद्धिमत्ता होगी । बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और बात यहां तक पहुंच गयी कि परदादा ने अपनी ही विवाह-योग्य कन्या का प्रस्ताव भावी दामाद के समक्ष रख दिया । इस प्रकार उस दिन के विवाह समारोह के अवसर पर दोनों के बीच काफी कुछ निश्चित हो गया । बाद में विवाह-प्रस्ताव की बात आगे बढ़ी और कालांतर में मित्र के पिताश्री की बुआ का पाणिग्रहण संस्कार भी संपन्न हो गया । बुआ एवं फूफा की उम्र में करीब बीस वर्ष का अंतर रहा होगा । ध्यान रहे कि तत्कालीन हिंदू समाज में प्रायः सर्वत्र कन्याएं कम उम्र में बाह दी जाती थीं, तेरह-चौदह साल या उससे भी कम उम्र में । पुरुषों की उम्र पर विशेष प्रतिबंध नहीं होता था; उनका दूसरा-तीसरा विवाह चालीस-चालीस वर्ष में होना असामान्य बात नहीं होती थी ।

विवाह के पश्चात् दो-चार वर्षों का समय ठीक से बीत गया । और फिर किसी रोग की चपेट में आकर मित्र के पिताश्री के फूफाजी की पहली पत्नी और उनके एकमात्र आत्मज की अकाल मृत्यु हो गयी । परदादा की भविष्यवाणी सच सिद्ध हो गयी । यह ज्योतिष की सफलता का एक उदाहरण था । लेकिन बात यही पर समाप्त नहीं हो गयी । कालांतर में बुआ-फूफा के एक-एककर के तीन संतानों का भी जन्म हुआ । लग रहा था समय उनके अनुकूल बीत रहा था । लेकिन फिर उनके भाग्य ने पलटा खाया और फूफाजी की भी अकाल मृत्यु हो गई । उस समय वे करीब पचास वर्ष के रहे होंगे और बुआ लगभग तीस साल की । विधवा हो चुकने पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने तीन छोटे बच्चों की समुचित परवरिश की । आगे क्या हुआ वह ज्योतिष के संदर्भ में अहमियत नहीं रखता ।

मेरे मित्र को आज तक यह समझ में नहीं आया है कि जिस ज्योतिष ने उनके परदादा को अपनी पुत्री का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न करने हेतु प्रेरित किया वही ज्योतिष उनको धोखा कैसे दे गया कि उनकी बेटी को वैधव्य का दंश झेलना पड़ा । मित्र का कहना है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो सही भविष्यवाणी कर पाना संभव ही नहीं है । मनुष्य केवल अनुमान लगा सकता है । अल्पकालिक अनुमान के सही ठहरने की गुंजाइश अधिक होती है, लेकिन दीर्घकालिक अनुमान के सही सिद्ध होने की संभावना अधिक नहीं हो सकती । – योगेन्द्र जोशी

2 टिप्पणियाँ

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2 responses to “असफल भविष्यवाणी की एक घटना

  1. विवेक से बड़ा कोई नहीं। ज्योतिष की असफलता के अनेक उदाहरण दैनिक जीवन में मिल जाते हैं. यह केवल इस के विश्वासी में हताशा निवारण के अलावा कोई अच्छा काम नहीं करती। जिस के लिए अन्य उपाय भी हो सकते हैं।

  2. बहुत सही कहा आप नें मेरे आस पास भी ऐसे लोग है जिन्होने अपना भविष्य निर्धारण का हक ज्योतिषाचार्यों को दे रखा है

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